कैसे उड़ते हैं हवाई जहाज
हवा में उड़ने और आसमान को चीरकर सात समुन्दर पार जाने की कल्पना को साकार करने का माध्यम है - हवाई जहाज़। आसमान की ऊंचाइयों को छूते हवाई जहाज़ को देखकर अक्सर यह सवाल मन में उठा करता है कि इतना भारी हवाई जहाज़ हवा में कैसे उड़ान भरता है? किस तरह इतने भारी हवाई जहाज़ में इतने सारे लोग बैठकर आसमान में सैर करते हैं और पायलट उस पर इतनी आसानी से नियन्त्रण कर लेता है।
| कैसे उड़ते हैं हवाई जहाज |
दरअसल हवाई जहाज़ के आगे एक पंखा लगा होता है जिसे 'प्रोपेलर' कहा जाता है। यह पंखा आगे की हवा को खींचकर ज़ोर से पीछे की ओर फेंकता है। जब हवाई जहाज़ मुक्त आकाश में उड़ान भरता है तो हवा फेंकने की इस विशेषता के प्रतिक्रियास्वरूप ही हवाई जहाज़ आगे की ओर गतिमान होता है।
वैसे तो हवाई जहाज़ का हर हिस्सा महत्त्वपूर्ण होता है, परन्तु सबसे महत्त्वपूर्ण होता है-हवाई जहाज़ का पंख (डैना), जिससे हवाई जहाज़ का सन्तुलन बनता है। पंख (डैना) हवाई जहाज़ के दोनों ओर होते हैं। ये नीचे की ओर धंसा हुआ (अवतल) और ऊपर की ओर से उठे हुए (उत्तल) आकार में होता है। दोनों पंखों के पीछे के भाग को 'एलरॉन' कहते हैं। इसे आवश्यकतानुसार ऊपर या नीचे किया जा सकता है। यह दोनों के पंखों के पिछले भाग में इस तरह से व्यवस्थित होता है कि जब इसे छोर से ऊपर उठाया जाता है तो यह दूसरी ओर से नीचे की ओर हो जाता है। दोनों क्रियाएं साथ-साथ होने से प्रतिक्रियास्वरूप विमान एक ओर झुक जाता है। विमान को जब किसी ओर झुकना होता है तो इसी प्रक्रिया को अपनाया जाता है।
पंख (डैने) के समान ही पीछे की ओर छोटे आकार में विमान पुच्छ होते हैं। इनसे हवाई जहाज़ को ऊपर या नीचे की ओर ले जाने का काम लिया जाता है। जिस प्रकार पंख (डैने) के पिछले भाग में एलरॉन होता है, उसी प्रकार विमान पुच्छ विमान में भी उत्थापक लगा होता है। यही सम्पूर्ण विमान को ऊपर की ओर उठाता या नीचे की ओर झुकाता है। इसमें ऐसी व्यवस्था है कि दोनों ओर काउत्थापक एक साथ ही उठाया और झुकाया जा सके। जब उत्थापक को ऊपर की ओर उठाया जाता है, तब उत्थापक और विमान पुच्छ विमान के बीच आए कोण पर हवा का प्रतिरोध होता है जिसके कारण विमान का पिछला भाग झुक जाता है और चूंकि विमान गतिमान होता है, अतः वह ऊपर उठने लगता है। इसके विपरीत जब उत्थापक को नीचे की ओर झुकाया जाता है, तब नीचे उत्थापक और पुच्छ विमान के बीच बन आये कोण पर हवा का प्रतिरोध होता है, जिससे विमान का पीछे का भाग उठ जाता है और विमान नीचे की ओर आने लगता है। इस विधि को अपनाकर विमान को धरती से आकाश और आकाश से धरती पर लाया जाता है।
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इसके अलावा विमान के सबसे पीछे के भाग में फिन लगा होता है, जो विमान को स्थायित्व देता है और उसे दाएं-बाएं भागने से रोकता है। विमान के फिन में ही पतवार लगी होती है जिससे दायांबायां किया जा सकता है। जब पतवार को बाईं ओर किया जाता है, तब पतवार से फिन पर आएं कोण में हवा का दाब बढ़ जाता है। जिससे पतवार को जब बायीं ओर घुमाया जाता है तब हवा के दाब के कारण विमान के पीछे का सिरा दूसरी ओर भाग जाता है। इससे सम्पूर्ण विमान बाएं घूम जाता है। इसके विपरीत विमान को दाईं ओर मोड़ दिया जाता है। इन सभी प्रक्रियाओं की सार-सम्भाल और विमान चालन की जिम्मेदारीपायलट की होती है। वह सारी क्रियाओं को नियन्त्रित करके विमान को अपने नियन्त्रण में रखता है। इन सभी गतिविधियों में उसकी मदद करने के लिए उसके कई सहायक भी नियुक्त होते हैं जो कि कॉकपिट में बैठकर विमान चालन की प्रक्रिया के साथ-साथ धरती पर बने नियन्त्रण कक्ष से भी लगातार सम्पर्क बनाकर रखते हैं। इन सभी कामों को करते हुए पायलट और उसके सभी सहयोगियों को पूरी तरह से सचेत रहना होता है।
इस तरह विमान के ज़रिए आसमान की सैर जितनी रोमांचक होती है, विमान चालन से जुड़े लोगों का काम उतना ही ज़िम्मेदारी और जोखिम भरा होता है ।

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