संसार में सभी लोगों की त्वचा का रंग एक सा नहीं होता। कहीं लोग एकदम काले मिलेंगे तो कहीं सफेद, तो कहीं पर सांवले। अधिकतर लोगों का रंग ना तो काला होता है और ना ही सफेद, बस इन दोनों रंगों का मिश्रण होता है। हर व्यक्ति की त्वचा का रंग उसके शरीर में उपस्थित कुछ रंगीन पदार्थों पर निर्भर करता है।
इन रंगीन पदार्थों को 'पिगमेंट (वर्णक)' कहते हैं। यह तीन तरह के होते हैं इनमें से पहला है 'मेलानिन' जो भूरे रंग का होता है। अगर शरीर में मेलानिन की मात्रा अधिक होती है तो शरीर काला दिखाई देता है। दूसरा है 'कैरोटीन' यह पीले रंग का होता है और तीसरा है 'हिमोग्लोबिन' इसका रंग लाल होता है। इन तीनों पदार्थों की अनुपस्थिति में त्वचा का रंग क्रीम होता है। असल में इन तीनों रंगों के मिश्रण से ही त्वचा का रंग बनता है। संसार में पाए जाने वाले मनुष्य की त्वचा का रंग इन तीनों पदार्थों को अलग-अलग अनुपात में मिलाने से ही बनता है, अर्थात जिस व्यक्ति के शरीर में हिमोग्लोबिन ज्यादा होगा उसका रंग लाली लिए सफेद होगा और जिस व्यक्ति के अंदर कैरोटीन अधिक होगा उसका रंग सांवला होगा।


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