बुखार सामान्य तौर पर किसी संक्रमण के रोग द्वारा उत्पन्न होता है रोग फैलाने वाले रोगाणु शरीर के रक्त में एक तरह का विषैला पदार्थ छोड़ते हैं जो रक्त में पहुंचकर शरीर के तापमान को उत्तेजित करता है । बुखार मे शरीर का तापमान बढ़ जाना एक असामान्य घटनाक्रम के कारण होता है इससे शरीर की त्वचा में स्थित रक्त नलिकाएं संकुचित हो जाती है इसी कारण शरीर का ताप बढ़ जाता है ।
यह बढ़ा हुआ ताप कोशिकाओं के उपायचयन को तीव्र कर देता है जिससे शरीर की ऊष्मा तीव्र गति से बढ़ जाती है । हाँ जब तक एक विशेष सीमा तक बढ़ जाता है तो रक्त नलिकाओं में फैल जाता है और रक्त का प्रवाह तेज हो जाता है जिससे रक्त त्वचा की बाहरी परत को स्पर्श करने लगता है, इस कारण रोगी को शरीर में गरमाहट महसूस होती है । जैसे - जैसे रक्त का प्रवाह बढ़ता है रोगी का शरीर तेज गर्म हो जाता है ।
जब रोगी औषधियों द्वारा विषाक्त द्रव को खून से अलग कर देता है तो उसका तापमान सामान्य हो जाता है ।



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